Wednesday, 9 January 2019

【 महानत्यागी बाबा जुमदेवजी यांचा संदेश क्रं. ०७, दिनांक ०१/०९/१९८०】 【"इस देश के नागरिक सत्य के लिये जग जाये। युग परिवर्तन हो रहा है। सत्ययुग। द्वापारयुग, त्रेतायुग औऱ कलियुग के बाद घुमकर सत्ययुग आ रहा है। इस युग परिवर्तन के आनेवाले प्रलय से जो मानव सत्य कर्म करेगा। वही बच पायेगा। इसलिये इस देश के नागरिक अपने जीवन मे सत्य, मर्यादा औऱ प्रेम का पालन करके, मानव जीवन सफल बनायें"।】

"३३ वे प्रकट दिन के उपलक्ष्य में निष्काम कर्मयोग द्वारा भगवत प्राप्ती के लिये मानव धर्म का मार्गदर्शन करने वाले महान त्यागी बाबा जुमदेवजी का इस देश के नागरिकों को संदेश"
【संदेश- दि:०१/०९/१९८०】
"इस देश के नागरिक सत्य के लिये जग जाये। युग परिवर्तन हो रहा है। सत्ययुग। द्वापारयुग, त्रेतायुग औऱ कलियुग के बाद घुमकर सत्ययुग आ रहा है। इस युग परिवर्तन के आनेवाले प्रलय से जो मानव सत्य कर्म करेगा। वही बच पायेगा। इसलिये इस देश के नागरिक अपने जीवन मे सत्य, मर्यादा औऱ प्रेम का पालन करके, मानव जीवन सफल बनायें"।

【प्रकरण क्रमांक: (१५)"आईची ममता"】

"मानवधर्म परिचय पुस्तक" (मराठी)'सुधारित पाचवी आवृत्ती'
प्रकरण क्रमांक: (१५)"आईची ममता"
महानत्यागी बाबा जुमदेवजी यांनी एका भगवंताची प्राप्ती केली आणि तेव्हापासुन ते भगवंताचा प्रति लोकांना जागृत करण्याचे कार्य निष्काम भावनेने करीत आहेत. या कृपेचा लाभ अनेकांना मिळत असल्यामुळे या मार्गात अनेक सेवक येत आहेत.